Friday, March 5, 2010

इस ब्लाग के पाठकों के लिए सूचना

बीते शनिवार को कुछ लुटेरों ने मेरा लैपटाप मुझसे छीन लिया. मुझे तत्काल यह समझने में वक्त लगा कि वह घटना मेरे साथ घटी है. अब इसके बारे में क्या बताऊँ कि लैपटाप कैसे छिना. बस इतना बताना काफी है कि लैपटाप मेरे लिए महज कुछ हजार रुपए की कोई चीज नहीं था. उसके साथ में मेरा जो कुछ छिना है उसकी भरपाई संभव नहीं. चोर लैपटॉप को चोर बाज़ार में अधिक से अधिक ३-४ हजार में बेच देंगे. उन्हें क्या पता कि उसमें मेरी दर्जनों कहानियां और फिल्मों की २ पटकथाएं हैं.

17 comments:

शरद कोकास said...

बहुत अफसोस है । अगर् बैक अप बना कर रखा होता तो कितना अच्छा होता ।

Mithilesh dubey said...

ओह बहुत दुःख हुआ सुनकर , आल इज वेल भाई आल इज वेल ।

अविनाश वाचस्पति said...

@ मिथिलेश दुबे

आल इज वेल
पर कौन सा
कुंए वाला ?

@ शरद कोकास

पूरी सावधानी बरतते हैं
बरतनी तो चाहिए
वरना बरतन की तरह
हो जाती है टूट फूट
जब हो जाए लूट।

वैसे चन्‍दन जी, जिस तरह आपने इस दुर्घटना का विवरण नहीं दिया। इससे अहसास हो रहा है कि आप वास्‍तव में चन्‍दन की तरह ही खुशबूदार हैं। आप अपने अंदर समेटी गई खुशबू यानी जो जो स्‍मरण है, सब लिख डालिए और सच मानिए अब उससे बेहतर ही लिखा जाएगा। ऐसा ही होता है। भविष्‍य में जो भी जब भी जहां भी लिखें, उसे हाथोंहाथ अपने मेल एकाउंट में अवश्‍य ही एक फोल्‍डर में अवश्‍य ही सुरक्षित कर दीजिए और अपने किसी एक अजीज के मेल खाते में भी मेल कर दिया कीजिए। ये दोनों कार्य एक साथ किए जाते हैं।

Shrikant Dubey said...

मैं काफी देर से ये सोचकर दुखी हूँ कि अविनाश जी वाली सलाह मैं आपको काफी पहले क्यूँ नहीं दिया? मैं तो घर के भीतर ही पड़े रहने वाले पी सी पर काम करता हूँ, फिर भी अपना सारा लिखा अपनी ही दूसरी आई डी पर मेल कर देता हूँ. बेहद दुःख हुआ.

vinay vaidya said...

I may just pray, your laptop will be back soon.
Please take care in future.

batkahi said...

behad afsos mitr...nayi technology ne jaise puri duniya ko hamari god me dal diya hai par jab ye bichhudti hai to hamare pas uski bharpayi nahi hoti..ek sabak to jarur lijiye...sari murgiyan ek nahi alag alag tokriyon me...

yadvendra

vidrohi said...

kuchh dinon pahle kisi sajjan ne blog pe hi bataya tha ki chandan jee ka laptop police ke kabje mein hai, mujhe ye pata nahi tha ki lutere chheen le gaye. mujhe laga ki policewalon ke hath agar kisi karan gaya hoga, to baad mein mil hi jaayega.
Afsos hua jaankar, lekin agar ab wo wapas nahi mil sakta to behtar hai ki Chandan jee us laptop ko apni creativity ke aade na aane dein. Back up rakhne wali baat aapni jagah sahi hai, lekin aaj ki itni wyast zindagi mein kis kis cheez ka back rakhein ? Ekdum se anishchitata ke mahual me, jahan pe kabhi bhi kuchh bhi ho sakta hai, aisa kiya ja sakta hai.Aisa hone se creativity shayad hamara sath chhod de. Maqbool Fida Husein police ke ghere me rah ke agar painting kar rahe hote, ya unhe lagta ki agle pal hi unka canvas, jispe wo kaam shuru kar chuke hain, chori ho jayega, ya bajrang dal ke gunde use nasht kar denge, to utne creative nahi rah jate.

Chandan jee, aap jis kahani ka zikr kuchh din pahle kar rahe the, wo bhi shayad laptop mein raha ho, aap jaldi se nayi urja ke sath apna kaam shru kar payein, aisi kamna hai. aur saare logon se request hai ki samay samay pe laptop, mobile ke information ya data apne e-mail pe dalte rahein, taki nuksaan ho,to kam ho.

संदीप पाण्डेय said...

चंदन तुम्हारे दुख को बहुत करीब से महसूस करता हूं। इसीलिए जब से जाना है तुम्हें फोन भी नहीं कर पाता। लगता है पता नहीं किस मनस्थिति में होगे तुम। क्या डिस्टर्ब किया जाए। एक भोली सी उम्मीद है मन में कि एक दिन तुम फोन करोगे आैर अपनी जिंदादिल आवाज में कहोगे कि तुम्हारा लैपटाप वापस मिल गया है। अविनाश जी की बातें गौरतलब हैं अब आगे से तुम एक हार्डड्रइव अलग से रखना जिसमें अपना जरूरी मैटर सेव कर सको। तुम्हारी इच्छाशाक्ति पर भरोसा है तुम इस दुख से जल्द उबरोगे भरोसा है मुझे।

Ashutosh Dubey said...

Ek bar pahle bhi gumi hui kahaniya mil gayi thi. yad hai?

Vivek Rastogi said...

अब ध्यान रखें बैकअप बनाकर रखें।

ashutosh said...

जानकर अफ़सोस हुआ, यह भी किसी अच्छे के लिए हुआ होगा, यही मान लीजिये.गुम चीजें नई चमक के साथ मिलेंगी, इसका भरोसा है और दुआएं भी.

vikas said...

behad dukhd,lekin ab aap phir se likhiye such me aap usse kahi behtar likhege,bharosa kijiye.

vikas pandey
www.vicharokadarpan.blogspot.com

अनूप शुक्ल said...

अफ़सोस जनक!

महाशक्ति said...

दु:खद, चोर आदि के लिये पैसो के साधन होते है किन्‍तु ये समान किसी के यादो से जुड़ा होता ह।

naveen kumar naithani said...

चीजों के गुम जाने का अफसोस है.
लिखी हुई चीजें दुबारा उस शक्ल में नहीं लिखी जा सकतीं.
यादवेंद्र्जी की बात से सहमत हूं.
फिर भी यह technology कुछ समझ में नहीं आयी.

standpoint said...

रचनाओं के खोने का दर्द सहज ही महसूस किया जा सकता है! वह समय और परिस्थितियां पुनः मुश्किल से उत्पन्न होती हैं,जिनमे किसी भी रचना का जन्म होता है! आप की इस अपूर्णीय क्षति का दुःख है !
-उमेश पाठक और अतुल ठाकुर ,दिल्ली .

dhananjay shukla said...

aage bhadho yaar,dheere-dheere to jindagi hi khoti ja rahi hai