Friday, December 4, 2009

शत्रु

मित्रता
जीने के आसान
से आसान हथियारों में से एक है।

जीवन भी कैसा/ कनेर की जामुनी टहनी/भारहीन गदा
भांजते रहो
आदर्श मित्रता कितनी सुखद रही होगी, कल्पनाओं में
कैसा घुटा जीवन बिताया होगा मित्रता की मिसालों ने
छोड़ देना प्रेमिका अपने मित्र के लिये, त्यागना प्रेम
(अपनी असफलता को ऐसा नाम देना)
माफ है
कि मरे हुए को कितनी बार मारोगे
मित्र के साथ
मित्र के लिए
विचार से जाना अपराध
है, चालू जीवन का शिल्प भी

मेरा शानदार दुश्मन खींचता है मुझे
विचारों के दोराहे तक, पैमाना है मेरा
मेरा शत्रु इतना ताकतवर जो पहुंचा आता
मुझे निर्णय के साफ मुहाने तक

जिनसे जूझता मैं आगे ही आगे
हर शत्रु मेरा सगा
हर निर्णय मेरा अपना।

सूरज.
Soorajkaghar@gmail.com

(सूरज की एक और कविता)

7 comments:

Rohit said...

बेहतरीन अभिव्यक्ति सूरज जी। प्रेम कविताओं की इस भनायक दौर में जहाँ सारा काम निकालने के लिये लोग दोस्ती का सहारा ले रहे हैं वैसे समय मे आपकी यह कविता सम्बल देती है। मैने देखा है कि कुछ लोग फायदे वाले दोस्तों के चक्कर में अपने अच्छे अच्छे दोस्तों को यह कह कर छोड़ देते हैं कि यार अब तुमसे बात करने की इच्छा ही नहीं होती। ऐसा वो सफलता पाने के बाद ही कहते हैं।

ऐसी कविता के लिये आपको बधाई।

rakampal said...

हर शत्रु मेरा अपना...क्या बात कही आपने! मैं तो आपका मुरीद हो गया। आजकल मै भी इन्ही समस्याओं से गुजर रहा हूँ। मन की बात कह दी भाई आपने तो।

शिरीष कुमार मौर्य said...

@मेरा शानदार दुश्मन खींचता है मुझे
विचारों के दोराहे तक, पैमाना है मेरा
मेरा शत्रु इतना ताकतवर जो पहुंचा आता
मुझे निर्णय के साफ मुहाने तक

जिनसे जूझता मैं आगे ही आगे
हर शत्रु मेरा सगा
हर निर्णय मेरा अपना।
****

............अच्छी कविता. सूरज की और कविताओं का इंतज़ार रहेगा.

Aparna said...

Suraj !!!! Ur this poem deserves much more than the comliments & congratulations of all of us.....

It ws awesome, somewhere everyone knows it & faces it in their life but to express it so simply & elegantly is an terrifying job....

I wud like to read more of ur poems,after ur evry poem i being your fan now

Udan Tashtari said...

बहुत विचारणीय और गहरी अभिव्यक्ति!!

ashutosh said...

badhaee ho,aapke kahne ka salika behad pyara aur naya hai,bilkul naya. uski tajgi saaf mahsus ki ja sakti hai.punah badhaee.

tarav amit said...

खूबसूरत अभिव्यक्ति !!
कवि को बधाई !!
प्रस्तुतकर्ता को धन्यवाद !!