Wednesday, February 3, 2010

ऐसी नींद किसे नही चाहिये!

गोएथे की आत्मकथा “ट्रुथ ऐंड फिक्शन रेलटिंग तो माई लाईफ” पढ़ने के दौरान कुछेक गलत/उलझाऊ अनुवादों से पाला पड़ा जिसका मुझे फायदा ही हुआ। गलत अनुवाद पढ़ते हुए हम हमेशा कई सारी कल्पनाओं के लिये आजाद होते हैं, जो मुझे काफी कुछ सिखाती है। इसी तर्ज पर इस किताब से मैने सीखा कि जब हम भविष्य काल में पहुंच कर पीछे यानी अतीत की ओर देखते हैं तो बाकी सब तो वही रहता है पर एक सूना डर जो उस वर्तमान में हमे सता रहा था, अब वह नदारद रहता है।

उदाहरण के लिये यह तस्वीर। चैन की नींद सो रही श्रेया(नाम इसकी दादी ने बताया)। ऐसी नींद सबको नसीब हो। पर अभी तो शिल्प की बात। यह तस्वीर अपनी अम्बाला से दिल्ली यात्रा के दौरान मैने ली है। जब मैं इसे ले रहे हूँ तो यह बच्ची गहरी नीन्द में सो रही है और मेरे मन में दो समान लालच है। पहला कि इस लड़की की नींद ना खुले और दूसरा, इसकी तस्वीर भी मैं ले लूँ। सूचनार्थ, वह कन्धा मेरा ही है जिससे लग के श्रेया सो रही है। अब मुझे सारा काम दाहिने हाथ से करना है।
मैने कैमरा ऑन किया और जैसे ही क्लिक किया बच्ची कुनमुनाई है। इसका मतलब फ्लैश इसके चेहरे पर तेज आ रहा है। मुझसे जैसे कोई अपराध हो गया हो, मैं एक तस्वीर के लिये किसी की नींद नही खराब कर सकता। अब मैं फ्लैश ऑफ करता हूँ और बेहद शाइस्तगी से सो रही श्रेया के चार पांच फोटो उतारे। फोटो उतारने के बाद मैं पूरे रास्ते सोचता रहा कि अगर मैं पहले उतर गया तो कही इस लड़की की नींद में खलल ना पड़ जाये। पर मेरी मुश्किल आसान हो गई है जो मुरथल आने से पहले ही मैडम नींद से जग जाती हैं और अपनी दादी से पानी मांग रही हैं।
दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली श्रेया तुम्हे धन्यवाद। कारण कि गोयथे की आत्मकथा पढ़ जाता और ध्यान मे आये इस शिल्प को भूल भी जाता पर तुम्हारी नींद ने इस शिल्प को साधने का मौका दिया।

10 comments:

संदीप पाण्डेय said...

वाकई क्या ऐसे निर्दोष चेहरे अब तस्वीरों में ही देखने को मिलेंगे चंदन। और हां मैं सचमुच पोस्ट पड़कर ही समझ पाया कि बच्ची तुम्हारे कंधे के आसरे सो रही है। मतलब इन दिनों तुमने भी गेटअप बदला हुआ है।

सागर said...

बहुत सुन्दर बात... मैं अभी ऐसा सोचता हूँ... कितनी शांति है श्रेया की चेहरे पर...

शशिभूषण said...

ऐसे भरोसेमंद कंधे भी सलामत रहें कौन नहीं चाहेगा.

Aparna said...

Such a beautiful emotion you potrait here, these innocence are seen in kid (children) only.... As we grow, our innocence lost its identity sonewhere.... This is very beautiful pic explaining your love for innocence & kind sleep....

Bodhisatva said...

ye to kamal kai chandan ji....ab aisa lagta hai ki hum apni ro ki pareshaniyo me humesha jeevan ki khubsurati miss kar jate hai...iske liye ek saaf dil chahiye aur kamal aankhe..aapke pas dono hai...mai bhi tarashana chahunga..is blog ke liye thanks kahe bina nahi raha jata!

prabha said...
This comment has been removed by the author.
prabha shankar said...

माह के सीने ऊपर अय शम्अ रू !

दाग़ है तुझ हुस्न की झलकार का

ashmantak said...

jab chandan ji ko “ट्रुथ ऐंड फिक्शन रेलटिंग तो माई लाईफ” pustak ne kalpana karne ke liye azad kar diya to unka pyaara dimaag shayad nimnlikhit panktiyon ke baare me kalpana ki hogi.......

// dedicated to shreya

The milky way upon the
Heavens
Is twinkling just for you
And mr. moon he came by
To say goodnight to you
I will sing for you i will
Sing for mother
We are praying for the world
And for the people everywhere
Gonna show them all we care

Oh my sleeping child the world is so wild
But you have build your own paradise
That's one reason why I will cover you sleeping child
If all the people around
The world
They had a mind like yours
We wud have no fighting and no wars
There would be lasting peace on earth
If all the kings and all
The leaders
Could see you here this way
They would hold the earth in their arms
They would learn to watch you play

Oh my sleeping child the world is so wild
But you ve build your own paradise
That's one reason why Iwill cover you sleeping child
I am gonna cover my
Sleeping child
Keep you away from the world so wild

Shekhar Mallick said...

ऐसी नींद अब हमें मयस्सर नहीं.काश बचपन लौट पाता...
जीवन की छोटी छोटी तस्वीरों को बुनने के लिए बधाई.

Shashwat said...

लाजवाब