Saturday, February 20, 2010

मुख्यमंत्री की धूमिल याद में

अब मैं उस राज्य का नाम तो नही ही लूँगा जिसकी राजधानी लखनऊ हो सकती है। ऐसा करते हुए डर लगता है और डर लगने का कारण यह ठहरा कि मेरे घर की दीवालें लाल रंग की हैं। मेरे पास एक टी-शर्ट भी लाल रंग का है। मेरे पास जो इनका भेजा हुआ अखबार आता है उसमें यदा कदा लाल अक्षर भी होते हैं। और लाल रंग की तरफदारी करने वाले लोगों की गिरफ्तारी में राज्य सरकारों को जितना फंड मिलता है वो इतना ज्यादा है कि पूरी सरकार आजकल सीमा की गिरफ्तारी में लगी है। वरना अगर ये डर नही होता तो कोई भी, यहाँ तक कि चापलूस से चापलूस सम्पादक भी, दूसरी कक्षा का कोई बच्चा भी, रट्टू अधिकारी भी, चोर पुलिस भी आराम से बता सकती है कि लखनऊ तो अपने उत्तर प्रदेश की राजधानी है। पर मुझे डर लग रहा है इसलिये मैं एक बार भी अपने सगे मुँह से उत्तर प्रदेश का नाम नहीं लूँगा आप चाहे जितनी मर्जी पूछ लें।
हुआ यह कि जैसे इनदिनों नक्सलवाद से लड़ने के नाम पर देशी सरकार राज्य सरकारों को अथाह फंड बाँट रही है, हू-ब-हू उसी तरह उनदिनों आतंकवादियों के नाम पर था। समूचे लखनऊ में अपनी निजी बसें चलाने वाला एक ठेकेदार चन्दे दे देकर चुनाव जीत आया था और मंत्री था (और पता नही किसके दुर्भाग्य से, आपके या मेरे, वो अब भी जीवित है) और पैसा उसके मुँह खून की तरह लगा हुआ था।
मुख्यमंत्री के साथ एक मीटिंग चल रही थी। मीटिंग में क्या तय होना था यह पहले से तय था इसलिये समूची मीटिंग कुछ अन्य ही बतकूचन होती रही। जब सभा समाप्त होने पर आई तो इस पैसे के भूखे मंत्री ने कहा: क्यों ना ‘सिमी’ पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाये।

ज्ञानी मुख्यमंत्री एक-ब-एक घबरा गये। उन्होने परेशान हो कर जबाव दिया: सिमी पर क्यों प्रतिबन्ध? वो तो इतनी सुन्दर अभिनेत्री रही! अभी तो सिमी ग्रेवाल ने अमिताभ को अपने कार्यक्रम में धो पोंछ दिया था। वो तो बहुत खूबसूरत है भई!

6 comments:

देवेश प्रताप said...

अच्छी प्रस्तुति ...

अनिल कान्त : said...

:)

Aparna said...

hmmm

prabha shankar said...

ye udate hue chidiyyo ke pankho se nikalne waale wo fur hai jo ye samajhte hai ki maine ab chidiya ko chhod diya aur ab chidiya gir jayegi, waqt ke garbh me in saare taatkaalik krityo ka positive answer chhupa hai,,,,,, jaise wo gaye waise ye bhi jaayenge,hume kya hum to kal bhi waise the aur kal bhi reheng

अशोक कुमार पाण्डेय said...

चंदन यह अद्भुत पोस्ट है…इस पक्षधरता के लिये मेरा सलाम!

Pankaj Upadhyay said...

ha ha.. seriously??